खुशखबरी: प्रतापगढ़ के 21 गाँव अब बनेंगे शहर - Pratapgarh Samachar

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शनिवार, 19 अगस्त 2017

खुशखबरी: प्रतापगढ़ के 21 गाँव अब बनेंगे शहर


प्रतापगढ़ : प्रतापगढ़ सिटी के दिन अब बहुरेंगे, कारण नगर पालिका शीघ्र ही शहर के लगभग 21 गांवों को शहर की सीमा में विलीन करने का प्रस्ताव शासन को भेजने वाली है। यह काम स्वयं DM की देखरेख में चल रहा है। ऐसे में आशा है कि एक हफ्ते के अन्दर प्रस्ताव शासन को चला जाएगा।

प्रतापगढ़ नगर पालिका "सी" श्रेणी की नगर पालिका में आती है। क्योंकि, यहाँ की आबादी केवल 76 हजार ही है। यद्यपि इस बेल्हा सिटी से लगे गाँव में लगभग 50 हजार की जनसंख्या ऐसी रहती है, जो हर तरह से शहरीकरण को अपना चूका है। लेकिन वहां नगरीय सुविधाएं मुहैया नही हो पा रही हैं। वहीँ , नगर की जनसँख्या में कमी आने के कारण शहर को सेंट्रल गवर्नमेंट की कई स्कीमों से बजट नहीं मिल पा रहा है। इसलिए अफसर सालों से सीमा विस्तार का प्रयास कर रहे हैं, मगर सियासी अड़ंगेबाजी के वजह यह काम हो नहीं पा रहा था। अब नगर पालिका के चेयरमैन का कार्यकाल ख़त्म हो जाने के बाद यह कार्य फिर स्पीड पकड़ रहा है। डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट शरद कुमार सिंह के निर्देश पर अधिशासी अधिकारी ने बेल्हा 21 गाँवों को नगर सीमा में सम्मिलित करने का प्रस्ताव तैयार करा लिया है। वे अपनी सलाहकार समिति की बैठक से इस संबंध में सुझाव लेकर शासन को भेज देंगे। इस बारे में कार्यकारी अधिकारी अवधेश यादव ने कहा है कि प्रस्ताव रेडी है। जल्द ही इसे सरकार को भेज दिया जाएगा।

कौन-कौन से गाँव बनगे शहर? जाने
चिलबिला, दहिलामऊ, बेल्हाघाट, बलीपुर पंडित, रंजीतपुर, महुली, पूरे ईश्वरनाथ, रूपापुर, सैयाबान, जोगापुर, सगरा, भंगवा, देवकली, करनपुर खास, पूरे नरसिंह भाग, करमचंदा करनपुर, कादीपुर, जिरियामऊ सहोदरपुर और पटखौली गांव पूरी तरह से नगर पालिका क्षेत्र में सम्मिलित किए जाने का प्रस्ताव है। टेऊंगा तथा गोपालापुर को आंशिक रूप से शामिल किया जाएगा।

गांवों हो या शहर होगा दोनों का लाभ
जीत-हार के गुणा-भाग के कारण कुछ मुट्ठीभर नेता भले ही सिटी का विस्तार होने पर सियासत करने की कोशिश कर रहे हो और इस जनहित के काम में रोड़ा बन रहे हो लेकिन सीमा विस्तार से सिटी क्षेत्र और सम्मिलित होने वाले गांवों दोनों का ही फायदा है। जहाँ गांवों को रोड, नाली,  स्वच्छता जैसी मूलभूत नागरिक सुविधाएं मिलेंगी। वहीं प्रतापगढ़ सिटी के लिए केंद्र और राज्य सरकार से अधिक बजट मिल सकेगा, जिससे शहर के विकास को रफ़्तार मिलेगी।