तिलक हटा, कलावा खोल कर ही इलाज कराओ, इलाज की आड़ में तगड़ा धर्म परिवर्तन जारी, ईसाई मशीनरी पूरे प्रतापगढ़ में सक्रिय - Pratapgarh Samachar

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शनिवार, 30 सितंबर 2017

तिलक हटा, कलावा खोल कर ही इलाज कराओ, इलाज की आड़ में तगड़ा धर्म परिवर्तन जारी, ईसाई मशीनरी पूरे प्रतापगढ़ में सक्रिय

प्रतापगढ़ जिले के खुलेआम धर्म परिवर्तन का खेल चल रहा है और प्रशासन, पुलिस, स्थानीय नेताओं व तथाकथित समाज सेवक सब आंखों पे पट्टी बांध के बैठे हैं। पुलिस को सूचना व धर्मांतरण से सम्बंधित साक्ष्य उपलब्ध कराने के बाद भी कोई ठोस कार्यवाही नही की गई। पिछले दिनों ये खबर सोशल मीडिया पर बहुत प्रमुखता से चली थी। पुलिस ने यीशु के नाम पर लोगों को बरगलाने का काम करने वाले राकेश सिंह (पादरी) को पांडेयपुर स्थित उसके घर से एक अन्य सहयोगी के साथ पकड़ा था व थाने ले गए थे। उस समय पुलिस ने रविवार होने के नाते थानाध्यक्ष बीपी त्रिपाठी ने स्पष्ट बोला था कि आज रविवार है इसलिए इनके एनजीओ के रजिस्ट्रेशन का वेरिफिकेशन नही हो सकता, क्योंकि इलाहाबाद कार्यालय बन्द होगा जहां से एनजीओ का रजिस्ट्रेशन हुआ है, वेरिफिकेशन के बाद ही इन्हें छोड़ा जाएगा। ये बातें थानाध्यक्ष ने सबके सामने कहा था जिसकी वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है।

वीडियो साभार साइबर सिपाही

     सबके सामने ये कहने वाले थानाध्यक्ष की भूमिका इसी बात से साबित हो जाती है कि सबके सामने ऐसा बोलने के बाद दिन में न खुला होने वाला रजिस्ट्रेशन कार्यालय रात में कब और कैसे खुल गया व वेरिफिकेशन भी हो गया और दोषमुक्त पाकर रिहा भी कर दिए गए। हर कोई समझ सकता है कि रात में कौन सा कार्यालय खुला होगा, कौन सी जाँच हुई होगी।
सैकड़ों की संख्या में लोगों को बरगलाया जाता है

यहाँ आने वाले लोग बताते हैं कि यहां आने के बाद हमें  हाथ मे कलावा, चन्दन-टीका, घर में हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीर, उनकी पूजा, फूल अगरबत्ती चढ़ाना, मंदिर जाना, व्रत रखना आदि सभी हिन्दू धर्म की रीतियों को करने से मना कर दिया जाता है, यहाँ तक कि नवरात्रि में दुर्गापूजा करने और पण्डालों में जाकर देखने व प्रसाद खाने तक से मना किया गया है, कहा गया है कि अगर ऐसा कुछ भी किया तो यीशु नाराज हो जायेंगे।
    इतना सब कुछ हो जाने के बाद भी किसी प्रशासनिक अधिकारी ने कोई खबर नही लिया है और नेताओं को तो वैसे भी वोट माँगने के अलावा कभी जनता की याद नही आती। इसके खिलाफ आवाज समाजिक संगठन  साइबर सिपाही के कुछ लोगों ने उठाई हैं।