प्रतापगढ़ नगरपालिका के निकम्मे कर्मचारियों की करतूत, दिन भर जलते हैं हाईमास्ट - Pratapgarh Samachar

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शुक्रवार, 6 अक्तूबर 2017

प्रतापगढ़ नगरपालिका के निकम्मे कर्मचारियों की करतूत, दिन भर जलते हैं हाईमास्ट

दिन के उजाले में जलता हुआ हाईमास्ट
ऊर्जामंत्री की अपील कि देशहित में ऊर्जा की बचत करें और नगरपालिका प्रतापगढ़ के हुक्मरान कर रहे हैं, ऊर्जा की बर्बादी।
नगर विकास विभाग भी ऊर्जा की बचत के लिये जारी किया है,शासनादेश कि दिन में स्ट्रीट लाइट्स जलती मिले तो जिम्मेदार होंगे अधिकारी।

प्रतापगढ़| प्रतापगढ़ समाचार डॉट कॉम की टीम ने कल सुबह के साढ़े सात से साढ़े आठ बजे तक एक घंटे तक प्रतापगढ़ शहर का भ्रमण किया। मकसद राष्ट्रहित में ऊर्जा की बचत की तहकीकात करना था। आईये प्रतापगढ़ समाचार के कैमरे में उसकी जो सच्चाई कैद हुई है, उससे आप को भी रूबरू कराते है। सिटी में दो दर्जन हाईमास्ट, पांच दर्जन मिनी हाईमास्ट और हजारों स्ट्रीट लाइट्स लगे हैं, जिका रख रखाव प्रतापगढ़ नगरपालिका करती है। शाम को जलाने और सुबह बुझाने का जिम्मा भी नगरपालिका पर है। नगरपालिका के जिन कर्मचारियो को इसे जलाने और बुझाने का दायित्व सौंपा गया वो लापरवाह किस्म के हैं। तभी तो सबेरे देर तक हाईमास्ट सहित स्ट्रीट लाइट्स जलती रहती हैं। मुहल्लों की गलियों में तो पूरे दिन स्ट्रीट लाइट्स जलती रहती हैं। उसे बुझाने वाला नगरपालिका से कोई नहीं आता। नगरपालिका के कर्मचारी से बात की गयी तो उन्होंने दलील दी कि एक आदमी कितनी बत्तियां बुझाता फिरेगा।
 

एक वास्तविकता ये भी है कि नगर पालिका अध्यक्ष हरि प्रताप सिंह के लखनऊ आवास एवं बेल्हा में फार्म हाउस समेत व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर जो नगरपालिका के कर्मचारी लगे थे, उन नगरपालिका के कर्मचारियो की वापसी अभी नहीं हुई। नगरपालिका प्रशासन को चाहिये कि उन सभी कर्मचारियो की वापसी सुनिश्चित करे और लाइट्स जलाने और बुझाने के लिये और कर्मचारी की नियुक्ति करे। गौर करने वाली बात ये है कि द्वितीय श्रेणी की नगरपालिका परिषद बेला, प्रतापगढ़ में पूरे नगरपालिका क्षेत्र की बात करें तो जितने भी हाईमास्ट और स्ट्रीट लाइट्स स्थापित कराये हैं, उनमें किसी में भी जलाने व बुझाने के लिये स्विच नहीं लगाए गए हैं। यानि जनता में यदि इसके प्रति किया जाए कि जनता ही इन जलती हुई लाइट्स को जला व बुझा लिया करें तो वो भी सम्भव नहीं। क्योंकि उसमें स्विच न होने से बिजली का करेंट लगने का खतरा और भय रहता है। भय वश आम जनता उसे चाहकर भी हाथ नहीं लगाती। प्रश्न ये उठता है, जब हाईमास्ट व लाइट्स स्थापित कराने के लिये बनाये गये इस्टीमेट में स्विच का जिक्र रहता है और कांट्रेक्टर का स्विच का भुगतान भी होता है, तो उसे नगरपालिका लगवाती क्यों नहीं? 
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खैर, यह सब लापरवाही कलेक्टर के नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन इसकी सुध लेने वाला कोई नही है।  न शासन, न प्रशासन, न नगरपालिका के हुक्मरान और न ही हमारे जनप्रतिनिधि। आखिर हर रोज इस लापरवाही से ऊर्जा की बर्बादी का जिम्मेदार कौन? कब सुधरेगा प्रतापगढ़?