लालगंज प्रमुखी में सह मात का खेल जारी,अब भाजपाई मायूस - Pratapgarh Samachar

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मंगलवार, 13 मार्च 2018

लालगंज प्रमुखी में सह मात का खेल जारी,अब भाजपाई मायूस

जैसा कि आपको पहले से ही पता है। लालगंज में ब्लॉक प्रमुखी का चुनाव होना था चुनाव वाले दिन ही नाटकीय अंदाज में सुप्रीम कोर्ट के आदेश व राज्य निर्वाचन आयोग के त्वरित निर्णय पर अचानक ही चुनाव स्थगित कर दिया गया । अब जिस मामले में सुप्रीम कोर्ट का स्थगन आया था उसी मामले की अगली सुनवाई यानी 12 मार्च कि सुनवाई के बाद जो फैसला आया उससे लालगंज में ब्लॉक प्रमुख पद पर चल रहे घमासान पर अंततः विराम लग गया। आखिरकार अविश्वास प्रस्ताव से शुरू हुए इस कश्मकश पर आज सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही एक खेमे यानी सुरेंद्र सिंह (कांग्रेसी खेमा) में खुशियों की लहर दौड़ पड़ी तो दूसरे खेमे में मातम छा गया। जबकि अभी 3 दिन पूर्व ही दूसरे पक्ष यानी रमेश प्रताप सिंह (भाजपाई खेमा) ने लालगंज में खुशियां मनाई थी। उनकी खुशियों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने पानी फेर दिया।
       

अब आपको ले चलते हैं पूरी कहानी की तरफ ज्ञात हो कि प्रमुख पद के चुनाव में रमेश प्रताप सिंह द्वारा ज्यादा बीडीसी सदस्य मैनेज कर लिए जाने की वजह से सुरेंद्र सिंह ददन को हार का सामना करना पड़ा था। परन्तु जीते हुए प्रमुख के खिलाफ सुरेंद्र उर्फ ददन सिंह ने राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी व उनकी विधायक पुत्री आराधना मिश्रा उर्फ मोना की छत्रछाया में अपना संघर्ष जारी रखा जिसकी वजह से वह बीडीसी सदस्यों को इकट्ठा कर तत्कालीन प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ले आये। तब तत्कालीन प्रमुख ने उस अविश्वास प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जिसमें तथ्यों के आधार पर उपचुनाव के ठीक एक दिन पहले अविश्वास प्रस्ताव के निरस्तीकरण व उपचुनाव स्थगन का आदेश ले आये। तब दूसरा पक्ष यानी सुरेंद्र सिंह उर्फ ददन के पक्ष ने अपने तथ्यों के साथ सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई यानी 12 मार्च वाली सुनवाई में साक्ष्य प्रस्तुत किये । जिसकी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने रमेश प्रताप सिंह की अविश्वास प्रस्ताव न पारित होने की रिट खारिज़ कर दी तथा हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई छिपाने के लिए रमेश प्रताप सिंह को फटकार लगाई और अपने ही आदेश को परिवर्तित करते हुए प्रमुखी उपचुनाव कराने का आदेश दिया।
      इस तरह से सत्ता में बने रहने के लिए गजब का खेल लालगंज में देखने को मिल रहा है। लालगंज की चाय की दुकानों पर लोग चटकारे के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करते देखे जा सकते हैं।