कौन है यह प्रतापगढ़ से आतंकवादियों की मदद करने वाला,जिसने प्रतापगढ़ का नाम किया खराब - Pratapgarh Samachar

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बुधवार, 28 मार्च 2018

कौन है यह प्रतापगढ़ से आतंकवादियों की मदद करने वाला,जिसने प्रतापगढ़ का नाम किया खराब

देश के लिए जान देने में तनिक भी न संकोच करने वाले भारत के फौजी दिन प्रतिदिन कहीं न कहीं देश की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे होते हैं। वहीं दूसरी तरफ भारत मे रहने वाले लोग ही धन और ऐश्वर्य  कमाने के चक्कर में देश से गद्दारी कर जाते हैं । इन्हीं गद्दारों में से 2 से 4 गद्दार प्रतापगढ़ से भी निकल रहे हैं हैं। इनमें से एक गद्दार का नाम है संजय सरोज । प्रतापगढ़ के इस युवक को रूपये कमाने का ऐसा चस्का चढ़ा की इसने देश से ही गद्दारी कर दी और आतंकवादियों के लिए फुंडिंगकी। इसने शुरूआत में उसने पेड़ कटवाने के ठेके से काम शुरु किया फिर, आंवला बेंचा। उसके बाद अपराध जगत में आया और कुछ दिनों तक एटीएम बूथों पर फ्राड किया और अंत में जब इसका मन और कमाने का हुआ तो इसने देश को धोखा दे दिया और पाकिस्तान में बैठे हुक्मरानों के लिए देश के ख़िलाफ़ आतंकवादियों के लिए टेरर फंडिंग का कार्य शुरू कर दिया।कुछ ही दिनों में उसका रहन-सहन अचानक बदल गया।

     प्रतापगढ़ के नगर कोतवाली के भगेसरा पृथ्वीगंज एरिये का निवासी संजय सरोज व उसके दोस्त नीरज मिश्रा को उत्तर प्रदेश एटीएस ने भारत के खिलाफ टेरर फंडिंग के आरोप में रविवार के दिन इनके घर से उठा लिया था। जहां कल तक संजय सरोज के आगे पीछे घूमने वाले कई लोग थे वहीं अब उन लोगों ने भी अपना ठिकाना बदल दिया।

    प्रतापगढ़ के ही निवासी अपने पिता की पंजाब में नौकरी के समय अपनी जवानी की शुरुआत पंजाब से करने के बाद पिता के रिटायर होने पर छह साल पहले प्रतापगढ़ आए संजय सरोज का रहन सहन मात्र तीन साल पहले बदलने लगा। इन्हीं 3 वर्षों में संजय लग्जरी वाहनों का शौकीन हुआ और महंगी शराब के सेवन का भी शौकीन बन गया। वर्तमान समय मे संजय के पासएक स्कापयो, एक होंडा सिटी,  दो बोलेरो, एक महेंद्रा पिकअप, 2 स्विफ्ट डिजायर कार, दो बुलेट, एक मोटसाइकिल व एक स्कूटी है । यह पूरी वाहनों की पलटन इन्हीं 3 वर्षों में सनजय के पास आ गयी और संजय की तरक्की देख हर कोई इस सोच में जरूर पड़ता कि एक कपड़े की दुकान व छोटा मोटा ट्रेवल्स के बिजनेस से इतना कुछ नहीं आ सकता फिर भी उसके शाही खर्च के चक्कर में हर स्वार्थी इंसान उसके आगे पीछे मंडराता रहता था।  सबसे बड़ी बात यह थी कि हर 3 दिन पर उसके हाथ में नया मोबाइल सेट होता और पुराना मोबाइल व नंबर बदल जाता था।

     इस तरह आतंकियों को फंडिंग करने के आरोप में पकड़े गए संजय सरोज ने रुपयों के दम पर बाजार में भौकाल बना रखा था । दूसरे लोगों की संजय व उसके साथ रहने वालों लोगों से विवाद की हिम्मत तक नहीं पड़ती थी।